संदेश

शिक्षा लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कला किसे कहते है

कला किसे कहते है?   कला   (आर्ट) शब्द इतना व्यापक है कि विभिन्न विद्वानों की परिभाषाएँ केवल एक विशेष पक्ष को छूकर रह जाती हैं। कला का अर्थ अभी तक निश्चित नहीं हो पाया है, यद्यपि इसकी हजारों परिभाषाएँ की गयी हैं। भारतीय परम्परा के अनुसार कला उन सारी क्रियाओं को कहते हैं जिनमें कौशल अपेक्षित हो। यूरोपीय शास्त्रियों ने भी कला में कौशल को महत्त्वपूर्ण माना है। कला एक प्रकार का कृत्रिम निर्माण है जिसमे शारीरिक और मानसिक कौशलों का प्रयोग होता है। परिभाषा मैथिली शरण गुप्त के शब्दों में, अभिव्यक्ति की कुशल शक्ति ही तो कला है  -- ( साकेत , पंचम सर्ग) दूसरे शब्दों में -: मन के अंतःकरण की सुन्दर प्रस्तुति ही कला है। वर्गीकरण कलाओं के वर्गीकरण में मतैक्य होना सम्भव नहीं है। वर्तमान समय में कला को मानविकी के अन्तर्गत रखा जाता है जिसमें इतिहास, साहित्य, दर्शन और भाषाविज्ञान आदि भी आते हैं। पाश्चात्य जगत में कला के दो भेद किये गये हैं- उपयोगी कलाएँ (Practice Arts) तथा ललित कलाएँ (Fine Arts)। परम्परागत रूप से निम्नल...

समाजवाद

*एक स्थानीय कॉलेज में अर्थशास्त्र के एक प्रोफेसर ने अपने एक बयान में कहा – “उसने पहले कभी किसी छात्र को फेल नहीं किया था, पर हाल ही में उसने एक पूरी की पूरी क्लास को फेल कर दिया है l”* ........ क्योंकि उस क्लास ने दृढ़तापूर्वक यह कहा था कि *“समाजवाद सफल होगा और न कोई गरीब होगा और न कोई धनी होगा”*, क्योंकि उन सब का दृढ़ विश्वास है कि यह सबको समान करने वाला एक महान सिद्धांत है..... तब प्रोफेसर ने कहा– "अच्छा ठीक है ! आओ हम क्लास में समाजवाद के अनुरूप एक प्रयोग करते हैं- सफलता पाने वाले सभी छात्रों के विभिन्न ग्रेड (अंकों) का औसत निकाला जाएगा और सबको वही एक काॅमन ग्रेड दिया जायेगा। ” पहली परीक्षा के बाद..... सभी ग्रेडों का औसत निकाला गया और प्रत्येक छात्र को B ग्रेड प्राप्त हुआl जिन छात्रों ने कठिन परिश्रम किया था वे परेशान हो गए और जिन्होंने कम पढ़ाई की थी वे खुश हुए l दूसरी परीक्षा के लिए कम पढ़ने वाले छात्रों ने पहले से भी और कम पढ़ाई की और जिहोंने कठिन परिश्रम किया था, उन्होंने यह तय किया कि वे भी मुफ़्त का ग्रेड प्राप्त करेंगे और उन्होंने भी कम पढ़ाई की l दूसरी परीक्षा में ......  स...

5 मिनट में आप मुझे ऐसा क्या सीखा या बता सकते है जो मेरे लिए उपयोगी हो?

5 मिनट में आप मुझे ऐसा क्या सीखा या बता सकते है जो मेरे लिए उपयोगी हो? एक ऐसा चुटकुला जो चुटकुला नहीं है , ज्ञान है । ---------------------------- एक पर्यटक, ऐसे शहर मे आया जो शहर उधारी में डूबा हुआ था ! पर्यटक ने रु. 500 का नोट होटल और रेस्टोरेंट के काउंटर पर रखा और कहा :- मैं जा रहा हूँ , आपके होटेल के अंदर कमरा पसंद करने!  होटल का मालिक फ़ौरन भागा घी वाले के पास और उसको रु. 500 देकर घी का हिसाब चुकता कर लिया !  घी वाला भागा दूध वाले के पास और जाकर रु. 500 . देकर दूध का हिसाब पूरा करा लिया !  दूध वाला भागा गाय वाले के पास और गाय वाले को रु. 500. देकर दूध का हिसाब पूरा करा दिया ! गाय वाला भागा चारे वाले के पास और चारे के खाते में रु. 500 कटवा आया !   चारे वाला गया उसी होटल पर ! वो वहां कभी कभी उधार में रेस्टोरेंट मे खाना खाता था। रु. 500 देके हिसाब चुकता किया ! पर्यटक वापस आया और यह कहकर अपना रु. 500 का नोट ले गया कि उसे कोई रूम पसंद नहीं आया ! न किसी ने कुछ लिया न किसी ने कुछ दिया सबका हिसाब चुकता ! बताओ गड़बड़ कहाँ है ? कहीं गड़बड़ नहीं है बल्कि यह सभी की गलतफ...

मन क्या है ? मन की अथाह सामर्थ को कैसे जगाए?

मन क्या है? मन को लेकर आदि काल से बहुत सारे मिथक प्रचलित है।लोगो ने तो मन को ही सारे दुखो का कारण बताए है। इसकी वजह है । लोगो ने इस पर प्रतिबंध लगा रखे है ।  इसके बारे में आगे बात करूंगा ।पहले समझते है मन क्या है ।मन को समझना बहुत जरूरी है। मन आप का बहुत पुराना है  सरीर तो कई आप ने बदले पर आप का मन पुरातन है आदि काल से वही है। मन कुछ और नहीं मात्र विचारो का संग्रह है। अगर विचार न हो तो मन भी नहीं होगा।मन का अस्तित्व विचारो से है। आप अगर खोज करे तो पाएंगे कि मन तबतक है जबतक विचार है ।और विचार हमेशा हमारे पास होते ही है ।विचार कहा से आते है कभी सोचा है  विचार भी इसी ब्रह्माण्ड में निवास करते है। अब सोचने वाली बात है ।विचार हमेशा बदलते है इसकी वजह है सांस जब भी हम सांस लेते है सासो के साथ एक विचार भी आता है। इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता कि विचार कैसे है अच्छे विचार है कि बुरे विचार , अच्छे विचार आनंद प्रदान करते है तो वहीं बुरे विचार दुख देते है । मै दुख सुख के गहराई में न जा कर सीधे मुददे की बात करता हूं । मन विचारो का संग्रह होने के कारण जैसे विचार बदलते है ।इसका असर मन पे पड़...

ध्यान क्या है। ध्यान कैसे करे।

ध्यान क्या है ध्यान कैसे करे? ध्यान के बारे में आप लोगो ने सुना ही होगा । बहुत सारे लोगो को समझ नहीं आता ध्यान क्या है लोग कहते है ध्यान से करो ध्यान से पढ़ो । ये लड़का कोई काम ध्यान से नहीं करता आदि। आप लोग हमेशा सुनते होंगे ये शब्द पर आप ने कभी समझने कि कोशिश नहीं की कोन करे बहुत परेशानी है इसमें आप ने छोड़ दिया आप ने कभी जानना चाहा लोग कहते है ध्यान करने के लिए ये क्या है बहुत सारे लोग ध्यान के बारे में नहीं जानते है। कुछ लोग कहते है एक जगह बैठ कर आंख बंद कर के ध्यान करो। पहले आप को समझना पड़ेगा ध्यान क्या है। ध्यान का मतलब है जानना । अभी आप क्या कर रहे हो । जब आप कुछ कर रहे होते हो तो आप के अंदर बहुत सारे विचार आते है पर आप उन्हें नहीं जान पाते। पर जब आप ध्यान में रहोगे तब आप के अंदर छोटे से छोटे विचार को भी जान पाओगे। ध्यान बैठ के ही किया जाय ये जरूरी नहीं है ध्यान आप हमेशा कर सकते हो । आप कुछ भी कर रहे हो आप ध्यान में रह सकते हो बस आप को आपने विचारो को जानना होगा । अगर आप थोड़ा सा सजग रहे तो आप सोते समय भी ध्यान में रह सकते है। आप को ये कई बार अनुभव भी हुआ होगा ।जब आप रात में सपन...

सपने सच होते है।

सपने सच होते है। क्या सपने सच होते है। देखने वालो पे निर्भर करता है। सपने तो सभी देखते है।पर अपने सपनों के लिए जो सब कुछ छोड़ने के लिए तैयार होते है।उनके सपने जरूर पूरे होते है। यहां हर इंसान कोई न कोई सपना सजाए बैठा है।पर आपने सपनों पे काम करने के लिए तैयार नहीं। जरूरत है आपने सपनों पे मर मिटने के लिए। अगर तैयार है। आप तो आप के सपने पूरे होने से से कोई नहीं रोक सकता। जिंदगी सबको मौका देती हर रोज देती है।कोई सवार जाता है कोई बिखर जाता है।मौका सबको बराबर का मिलता है। फैसला आप को लेना है ।सवार जाना है।या बिखर जाना है। मुश्किलें हर मोड़ पे आती है।मुश्किलों से डरना नहीं है ।भागना नहीं ।मुश्किलों का सामना करना है। साफला आप के क़दमों में होगी। सपने अगर सच नहीं हो रहे तो रास्ते बदलो। सिद्धांत नहीं। क्योंकि पेड़ आपने पत्ते बदलते है जड़े नहीं। इंसान बहुत जल्दी हार मान लेता है।यही उसके सपनों के पूरा होने के रास्ते का बड़ा कारण है। जरा सी मुश्किल क्या आती है। इंसान घबरा जाता है।सब कुछ छोड़ के बैठ जाता है। क्या पता चंद कदम पे सपने पूरे हो सकते थे।पर वह आपनी डर की वजह से घबरा के वापिस बैठ जाता है। ...

ब्रह्माण्ड की उत्पति

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कैसे हुई है? एक  सवाल हमेशा से मानव मस्तिष्क में घूम रहा है।मानव इस सवाल को ले कर काफी उत्साहित होता है।पर आज तक इसके बारे में कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आ सके। हमारे समाज मे दो मत है। पहला मत जो है। हमारे पूर्वजों के द्वारा बना है। जैसे बेद पुराण कथा आदि है।  हमारेे पूर्वज बहुत ही। बुद्धिमान थे। उनकी खोज को  सही साबित हमारा विज्ञान कर रहा हैं।पर जब बात ब्रह्माण्ड की उत्पति की आती है।तो मतभेद हो जाता हैं। विज्ञान और शास्त्र में अलग अलग मत  है। ब्रह्माण्ड की उत्पति पे शास्त्र के मत  हमारे शास्त्र अनेक है। हर शास्त्र किसी न किसी देवी देवता के केंद्र में लिखे गए है। हर शास्त्र के नायक अलग अलग है। इस वजह से इसमें आपस में मत भेद है। जैसे -  शिव पुराण के नायक  शिव जी है। शिव  पुराण में  कहा  गया  है।  की  ब्रम्हाांड  की  उत्पति शिव जी ने की है। शिव  जी की द्वारा सबकी  रचना की गई है ।ऎसे  ही विष्णणु  पुराण के नायक विष्णु जी है। हमारे यहां  बहुत धर्म  ग्रंथ  है। हर ...

तू ही है। तेरा

अपने जीवन में हम बहुत लोगो से मिलते है।कभी कभी किसी से इतना जुड़ जाते है।हमे लगता है।मेरे लिए वहीं सब कुछ है।ऐसा आप को लगता पर क्या कभी आप ने सोचा उसे क्या लगता है।हो सकता है उसे कोई और सब कुछ लगता हो।पर इससे कोई मतलब नहीं हमे लगता जो वो सब ठीक ही है।हम सबकी आदत हो गई है।अपने आप से दूर भागने की हमे तो दूसरे में सुकून नजर आता है ।पास जाने पे पता चलता अरे नहीं ये तो दुख दे रहा है।हमारी आशाएं सब मिट्टी में मिल जाती है।याद हमको आपनी आती नहीं ।सरा सुकून खुद में है।हम संसार में दुड़ने चले जाते है।जब वापिस आते है। रोते हुए।हमारे महापुरषों ने कहा है।जिस तरह रेगिस्तान में पानी का भ्रम हो जाता है।और प्याशा पानी के पिछे पिछे भगता अंत में मार जाता है।उसी तरह संसार में हमे सुख का भ्रम होता है।और हम भागने लगते है।अंत में कुछ नहीं हाथ आता बस पश्चाताप करना पड़ता है। भगवान शिव ने कहा - जेसे भोर का सपना होता है ।उसी तरह संसार है।सपने की सत्यता सपने में लगती है।पर जागने पर पता चलता है।कुछ नहीं।सपने में आप राजा बन जाइए।महल हो शेना हो।नोकर चाकर हो।पर जागते ही सब गायब कहा गया।अगर वह सत्य था।तो नहीं जाना चाह...

सोचो मगर आपने लिए

सोचना किसे अच्छा नहीं लगता।आज हर इंसान कुछ न कुछ सोचता रहता है।पर दुर्भद्य की बात ये है।की वह आपने बारे में कम दूसरो के बारे में ज्यादा सोचता है।आज इसी के कारण समाज की दुर्दशा हो रही है।ये इंसान कब समझे गा।की अपना बिकाश पहले जरूरी है।एक कड़का दूसरे कड़के की क्या सहायता कर सकता है। सर्वप्रथम हमको अपना कल्याण करना होगा।ये बात पक्के से समझना चाहिए। हमने देखा है।लोगो को अपने जीवन के बेहतरीन पल दूसरो के बारे में सोचते देखा है।वह उस पल क्या नहीं कर सकते थे।पर उनोन आपने जीवन के बेहतरीन पल बर्बाद कर दिए।और चिंता अलग पाल ली।जीवन का स्त्यानाश तो किया साथ में शरीर का भी ख्याल नहीं आया। बहुत जल्दी बूढ़े हो गए। अंत में समशान यात्रा की । ऐसे जीवन से क्या फायदा।जब समय था। आपने बारे में सोचने का तो दूसरो के बारे में सोचा।अंत में पश्चाताप करना पड़ा।जीवन आप का खुशहाल होगा।तब आप की वजह से कितनो का जीवन खुशहाल होगा।ये बात आप समझते क्यों नहीं है।मै आप से बात कर रहा हूं।आप अपने बारे में विचार करे। आप कोन है।आप का अस्तिव क्या है।क्यों आप ने जन्म लिया है।जब आप विचार करेंगे। तब आप पाएंगे। की हमे तो कुछ नहीं मा...

तू एहसास तो कर

एहसास अगर हो जाए ।तो आपने आप में खुशी खोज लोगे। बरना संसार की खाक छानते रहा जाओगे।आप एहसास तो करो।आप में क्या नहीं है।खुशी है प्यार आप में दया है।सब कुछ तो है। बस आप एहसास नहीं करते हो। और भतक रहे हो।आपने उपर दुख चिंता की गठरी लादे ।परेशान होना छोड़ दे।तेरा कुछ बूरा नहीं हो सतकता।तेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।तू क्यों परेशान है।तू एक बार आपने आप में देख तू क्या है। तू महान से भी महान है।तू वही है।तू आपने स्वभाव में जाग। जब तक तुझे एहसास नहीं होगा।तबतक तेरे दुख दूर नहीं होगे।बचा ले आपनी जिंदगी। कहने का मतलब ये है।की आप आपने जिंदगी के मालिक हो।आप आपने अनुसार आपनी जिन्दगी में जो चाहे पा सकते है।आप अपने अनुसार जिंदगी जी सकते है।खुशियां आप के हाथ की बात है।सफलता आप की गुलाम है।आप क्या हो आपको ये जानना ही होगा।गुलामी की जिदंगी से अच्छा मार जाना बेहतर है।और जब हम आपनी बेवकूफी से गुलाम बने हो तो कहना क्या।बचपन से लोगो ने बहुत कुछ बताया।बहुत कुछ शिखाया हम मानते चले गए।आप जरा सोचो आप का क्या है।संसार से ही मिला है।जो कुछ मिला है।अरे आप का नाम भी जो मिला है।किसी दूसरे ने दिया है।इसका मतलब आप का...

क्या जिन्दगी में दुख भोगने के लिए आए हो।

हमें जो जीवन मिला है।हम उसके साथ क्या कर रहे है।जीवन में खुशी का नामो निशान तक नहीं नजर आ रहा है।अगर कुछ आ रहा है। तो बस निराशा दर्द ।कब तक येसे जिन्दगी जिएंगे।आपने आप को जबतक आप नहीं जाने गे। तबक दुख दर्द आपका पीछा नहीं छोड़ने बाले।आप कोंन है।क्या है ।कहा से आए है। बचपन में हमारे पास इससे बहुत सवाल थे।पर समय के शाथ हमने अपने आप को तो समझा लिया। पर दुख परेशानियों से पीछा क्येशे छुड़ाएंगे। अब समय है।हमें सही दिशा में काम करने का।बाहरी दुनिया के माया जाल में आप आ चुके है।अब इससे बाहर निकाला मुश्किल हो रहा है।और दुख दर्द बड़ते ही जा रहा है।हमारे समाज में आदि काल से संत महापुरुष हुए।जो इसी तकलीफ का रास्ता निकालते आए है।हमें उससे शिख के आपने जीवन को सफल बनाना होगा।सत्य ही हमारे जीवन को सुंदर  और प्रभावी बना सकता है।बिना सत्य को जाने हम कुछ नहीं है।समाज में लालच कुट कुट के भरा है।लोग लेना जानते है।मगर मिलता किसी को भी नहीं है। कारण देने वाला कोई तो हो।आप से आमिर कोई भी नहीं है।ना हो सकता है।पर आप को आपने आप का ज्ञान ही नहीं है।दुख इसी बात का है। कोई बताने वाला नहीं है।और जो बताया गया वह...